सोमवार, 27 अक्टूबर 2025

बाबा महाकाल की आरती लिरिक्स | मृत्युंजय महाकाल की आरती, महत्व और लाभ - DharmikGranth

 

Mahakaleshwar Temple in Jaisinghpura, Ujjain Madhya Pradesh during evening aarti of Lord Mahakal

बाबा महाकाल की आरती: मृत्युंजय महाकाल की मंगल आरती, महत्व, लाभ और करने की विधि

भारत की आध्यात्मिक परंपरा में भगवान शिव का स्थान सर्वोच्च है। उनके अनेक रूपों में से एक है — महाकाल, जो स्वयं “काल के भी काल” हैं। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग को समय और मृत्यु के चक्र पर विजय पाने वाला माना गया है। श्री महाकाल की आरती का पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में शांति, समृद्धि और शक्ति का संचार होता है। सावन के महीने, सोमवार या महाशिवरात्रि जैसे शुभ अवसरों पर यह आरती विशेष फलदायी होती है।

बाबा महाकाल की आरती लिरिक्स (Baba Mahakal Ki Aarti in Hindi)

काल की विकराल की, त्रिलोकेश्वर त्रिकाल की,
भोले शिव कृपाल की, करो रे मंगल आरती,
मृत्युंजय महाकाल की, करो रे मंगल आरती,
मृत्युंजय महाकाल की, बाबा महाकाल की,
ओ मेरे महाकाल की,
करो रे मंगल आरती, मृत्युंजय महाकाल की॥

पित पुष्प बाघम्बर धारी, नंदी तेरी सवारी,
त्रिपुंडधारी हे त्रिपुरारी, भोले भव भयहारी,
शम्भू दिन दयाल की, तीन लोक दिगपाल की,
कैलाषी शशिभाल की,
करो रे मंगल आरती, मृत्युंजय महाकाल की॥

डमरू बाजे डम डम डम, नाचे शंकर भोला,
बम भोले शिव बमबम बमबम, चढ़ा भंग का गोला,
जय जय ह्रदय विशाल की, आशुतोष प्रतिपाल की,
नैना धक धक ज्वाल की,
करो रे मंगल आरती, मृत्युंजय महाकाल की॥

आरत हरी पालनहारी, तू है मंगलकारी,
मंगल आरती करे नर नारी, पाएं पदारथ चारि,
काल रूप महाकाल की, कृपा सिंधु महाकाल की,
उज्जैन महाकाल की,
करो रे मंगल आरती, मृत्युंजय महाकाल की॥

काल की विकराल की, त्रिलोकेश्वर त्रिकाल की,
भोले शिव कृपाल की, करो रे मंगल आरती,
मृत्युंजय महाकाल की, करो रे मंगल आरती,
मृत्युंजय महाकाल की, बाबा महाकाल की,
ओ मेरे महाकाल की,
करो रे मंगल आरती, मृत्युंजय महाकाल की॥

बाबा महाकाल की आरती का महत्व

महाकालेश्वर भगवान समय (काल) के स्वामी हैं। वे सृष्टि, पालन और संहार — तीनों के अधिपति हैं। उनकी आरती करने से व्यक्ति न केवल आध्यात्मिक शांति प्राप्त करता है, बल्कि उसे जीवन की चुनौतियों से पार पाने की शक्ति भी मिलती है। आरती का अर्थ है — “आराधना के माध्यम से प्रकाश देना”। जब हम महाकाल की आरती करते हैं, तो यह हमारे भीतर के अंधकार को दूर करके भक्ति का प्रकाश जगाती है। जो व्यक्ति श्रद्धा और समर्पण के साथ प्रतिदिन महाकाल की आरती करता है, उसके जीवन से भय, रोग, मानसिक चिंता और नकारात्मकता समाप्त हो जाती है।

बाबा महाकाल की आरती करने के लाभ

सुख-शांति की प्राप्ति: महाकाल की आरती करने से घर और मन में शांति का वास होता है। मानसिक तनाव दूर होकर व्यक्ति में आत्मविश्वास बढ़ता है।

धन-समृद्धि का वास: भगवान महाकाल की कृपा से जीवन में ऐश्वर्य, धन और सफलता के अवसर बढ़ते हैं। व्यापारी और नौकरीपेशा दोनों के लिए यह आरती अत्यंत शुभ मानी जाती है।

भय और बाधाओं से मुक्ति: “काल के भी काल” महाकाल की उपासना से व्यक्ति के जीवन से नकारात्मक शक्तियाँ, शत्रु और बाधाएँ दूर होती हैं।

कुंडली दोषों का निवारण: शनि, राहु और केतु के दोषों को दूर करने के लिए महाकाल की आरती एक प्रभावशाली उपाय है। यह ग्रहों के अशुभ प्रभावों को कम करती है।

वैवाहिक सुख और संतान प्राप्ति: जो दंपत्ति नियमित रूप से महाकाल की आरती करते हैं, उनके दांपत्य जीवन में खुशहाली बनी रहती है और संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है।

मोक्ष की प्राप्ति: महाकाल की आरती व्यक्ति को जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त होकर मोक्ष की ओर अग्रसर करती है।

महाकाल की आरती कैसे करें?

आरती से पहले भगवान शिव या महाकाल की विधिवत पूजा करनी चाहिए। यहाँ सही तरीका बताया गया है:

  • सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा की थाली में घी का दीपक, धूप, बेलपत्र, फूल, चंदन और फल रखें।
  • “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करते हुए महाकालेश्वर का ध्यान करें।
  • दीपक जलाकर दोनों हाथों से आरती करें और आरती के बाद घंटा बजाएँ।
  • आरती समाप्त होने के बाद भगवान को जल अर्पण करें और प्रसाद बाँटें।

आरती के समय पूरे परिवार को साथ बैठकर भगवान के नाम का कीर्तन करना अत्यंत शुभ माना गया है।

बाबा महाकाल की आरती का सही समय

बाबा महाकाल की आरती का सर्वश्रेष्ठ समय है —
ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4 से 5 बजे) या फिर शाम का समय (संध्या काल)

इसके अलावा विशेष पर्वों पर यह आरती अत्यधिक शुभ फल देती है:
  • सावन माह के सोमवार को
  • महाशिवरात्रि पर
  • प्रदोष व्रत के दिन
  • या हर सोमवार को शिव मंदिर में

इन दिनों में आरती करने से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

बाबा महाकाल की आरती के बाद क्या करें?

आरती के बाद निम्न कार्य करने चाहिए:

  • भगवान को प्रणाम करें और हाथ जोड़कर आभार व्यक्त करें।
  • जल से आचमन करें (थोड़ा पानी ग्रहण करें)।
  • “जय श्री महाकाल” का जयघोष करें।
  • अंत में यदि कोई भूल-चूक हुई हो, तो क्षमा याचना करें।
  • प्रसाद ग्रहण करें और परिवार या भक्तों में बाँटें।

निष्कर्ष

बाबा महाकाल की आरती केवल पूजा का एक हिस्सा नहीं है, बल्कि यह आत्मा को जागृत करने और मन को स्थिर करने का एक शक्तिशाली माध्यम है। जो व्यक्ति नियमित रूप से श्रद्धा और भक्ति के साथ यह आरती करता है, वह भय, दुख और चिंता से मुक्त होकर जीवन के हर क्षेत्र में सफलता और संतोष प्राप्त करता है।

बाबा महाकाल की यह आरती हमें यह सिखाती है कि —

जो समय (काल) का सम्मान करता है, वही जीवन के हर क्षण को जीतता है।

महाकाल की कृपा आप पर बनी रहे —

जय श्री महाकाल!